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map 3
map 3
Last Update: 2022-05-23
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muze map kardo
i had sent him
Last Update: 2016-02-15
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map job which ha
map job which is
Last Update: 2021-07-15
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our truth nation map
she is fine
Last Update: 2022-09-01
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tere pas physical ka world map
world map
Last Update: 2018-05-22
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@ item capital name in map popup
you have found a bug in a map. please contact the author and tell the %1 map has nothing associated to colour %2, %3, %4. @item capital name in map popup
Last Update: 2018-12-24
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इक्विरेक्टेंगुलर (e) map projection method
rectangularmap projection method
Last Update: 2018-12-24
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aapko kaisa laga map in meaning english
aapko kaisa laga map in meaning english
Last Update: 2020-11-27
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do you have a map some i lost in your eyes?
do you have a map some i lost in your eyes
Last Update: 2023-02-24
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home map banane wale ko english mein kya kehta hai
home map banane wale ko english mein kya kehta hai
Last Update: 2020-08-08
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link for this find attached the image of the botswana map.
link for this find attached the image of the botswana map.
Last Update: 2021-06-25
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map kara ol deparment mi yeu shakat nahi karn mla bar nhi vatat ahe
map kara ol deparment mi yeu shakat nahi karn mla bar nhi vatat ahe
Last Update: 2021-03-23
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bhai, idp aur wbr mein jo heat map hai uska day wise line adherence projections match kar raha hai
hey, i didn't understand brother.
Last Update: 2023-06-06
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ma'am geo ch 5. map and geo ch 6. q/ans bhej do group mai
ma'am geo ch 5. map and geo ch 6. q/ans bhej do
Last Update: 2023-10-19
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विनिर्माण स्वचालन प्रोटोकॉल , 1982 के अपने पहले संस्करण से लेकर 1987 के map 3 . 0 संस्करण तक कई बार परिवर्द्धित किया गया ।
the manufacturing automation protocol was revised several times between the first issue in 1982 and map 3 . 0 in 1987 .
Last Update: 2020-05-24
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'महाविश्व का घटनाचक्र अन्वेषण' कहूँगा, जिसमें हम सृ्ष्टि के अवशेषों के माध्यम से यह अनुमान लगाने का प्रयास करेंगे कि आरंभ में क्या हुआ था, फिर उसे अच्छे से समझने की कोशिश करेंगे. तो एक प्रश्न मैंने आपसे पूछा था, कि जब आप चारों ओर नज़र घुमाते हैं तो क्या पाते हें? आप इस पूरे जगह को देख रहे हैं जिसे डिज़ाईनरों ने बनाया है और लोगों की मेहनत से बना, पर आप जो देख रहे हैं उसमें लगाई गई बहुत सी सामग्री ऎसी है जो पहले से ही मौजूद थी, केवल उसे एक सुनिश्चित आकार दिया गया है. अब प्रश्न यह है कि ये सामग्री यहाँ पहुँची कैसे? नए रूप में ढलने से पहले वाली अवस्था में वो कैसे पहुँची, और उसके पहले वो क्या थी? तो अब सवाल ये है कि इन तारतम्यों का आपस में क्या संबंध है? देखने वाली बातों में ये भी है, कि ब्रह्माण्ड का प्रारंभ कैसे हुआ और यह इस आकार में कैसे आया? ब्रह्माण्ड की सृष्टि और उसके विकास की वो प्रक्रिया कैसी थी जिससे गुज़र कर हमें इस प्रकार की सामग्री मिली? तो ये आज के विषय का एक अंश होगा, और अब आगे मैं आपको हबल अल्ट्रा डीप फील्ड चित्र दिखाना चाहूँगा. अगर आप इस तस्वीर को देखें, तो आप इसके अधिकांश भाग में अंधकार के बीच में कुछ चमकीले बिंदु पाएँगे. चमकीले वस्तुओं में चार सितारे हैं, और आप उन्हें वहाँ देख सकते हैं -- छोटे प्लस के आकार के. ये सितारा है, ये सितारा है, बाकी सब कुछ आकाशगंगा हैं, ठीक है? तो यहाँ आप हजारों आकाशगंगाओं को अपनी आंखों से आसानी से देख सकते हैं. और जब मैं विशेषकर इस आकाशगंगा को देखता हूँ, जो हमारी आकाशगंगा जैसी लगती है, तो मुझे यह जानने की उत्सुकता होती है कि क्या वहाँ भी किसी आर्ट डिज़ाईन कॉलेज का सम्मेलन चल रहा है, जहाँ बुद्धिमान जीव यह सोचविचार कर रहे हैं कि किस तरह के डिज़ाईन बनाए जाएँ, और वहाँ कुछ ब्रह्माण्डविद भी बैठकर सोच रहे हों कि ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कहाँ से हुई, और ये भी हो सकता है कि उस आकाशगंगा से कोई हमारी ओर देख रहा हो, और अनुमान लगा रहा हो कि यहाँ क्या होता होगा. मगर दूसरी और बहुत सारी आकाशगंगाएँ हैं, जिनमें से कुछ पास हैं, और कुछ-कुछ सूर्य के रंग की ही हैं, जबकि कुछ दूर हैं और इसलिए तुलनात्मक रूप से ज़्यादा नीले प्रतीत होते हैं. पर अब आपके मन में ये सवाल आएगा -- कि इतनी सारी आकाशगंगाएँ क्यों हैं? चूँकि ये आकाश के एक साफ-सुथरे भाग का चित्र है, इसमें केवल 1,000 आकाशगंगाएँ हैं. हमारा अनुमान है कि -- हबल स्पेस टेलिस्कोप से दिख जाने वाले, मतलब यदि आप समय निकालकर चारों तरफ स्कैन करके देखें तो -- क़रीब 100 अरब आकाशगंगाएँ देखी जा सकती हैं. ठीक है? आकाशगंगाओं की यह बहुत बड़ी संख्या है. हमारी आकाशगंगा में तारो की संख्या भी लगभग इतनी ही है. पर जब आप इस तरह की जगहों को देखेंगे, तो पाएँगे कि यहाँ तारों से अधिक आकाशगंगाएँ हैं, जो अपने आप में एक पहेली है. आपके मन में ये सवाल उठना चाहिए कि, वो कैसी डिजाइन थी, और किस तरह की सृजन प्रक्रिया, व किस तरह की संरचनाएँ जिसने संसार को ऐसा बनाया? और अब मैं आपको जो दिखाने जा रहा हूँ, वह वास्तव में और भी जटिल है. हम उसे समझने-बूझने की कोशिश करेंगे. हमारे पास एक साधन है जो इस अध्ययन में हमारी सहायता करता है, और वो यह कि ब्रह्माण्ड का इतना अकल्पनीय विशाल होना उसे कुछ मायनों में टाईम मशीन जैसा बना देता है. हमने इन गोलाकृति पिंण्डों का समूह जैसा मॉडल बनाया है जिसे आप देख रहे हैं. हम पृ्थ्वी को इन पिण्डों का केन्द्र मान लेते हैं, इसलिए क्योंकि हम इसी स्थान से प्रेक्षण कर रहे हैं. चाँद हमसे बस दो सेकण्ड की दूरी पर है, तो अगर आप साधारण रोशनी में चाँद का चित्र लें तो ये चाँद की अब से दो सेकण्ड पहले की अवस्था है, जिससे बहुत फर्क नहीं पड़ता. दो सेकण्ड मतलब हाल की ही बात है. सूरज को हम आठ मिनिट बाद देखते हैं. ये भी कोई बड़ी बात नहीं है, यदि कोई सौर तूफ़ान हमारी ओर नहीं आ रहा हो, और हमें उससे बचना ज़रूरी हो. ऐसे में आप पूर्वचेतावनी रखना चाहेंगे. पर अगर आप बृ्हस्पति तक जाएं जो कि 40 मिनिट दूर है. तब समस्या आती है. आपने मंगल के बारे में सुना होगा कि वहाँ संपर्क साधना मुश्किल है क्योंकि प्रकाश को वहाँ तक पँहुचने में काफी समय लगता है. पर अब यदि आप सबसे निकटतम तारों को देखें, सबसे पास के 40 या 50 तारों को, वे लगभग 10 प्रकाशवर्ष की दूरी पर हैं. याने अगर आप अभी उनका चित्र खींचे, तो वो दरअसल उनके 10 साल पहले की अवस्था है. अब अगर आप आकाशगंगा के केन्द्र को देखें, तो वो उनकी हज़ारों साल पहले की अवस्था है. अगर आप एन्ड्रोमिडा को देखें, जो हमारी सबसे क़रीबी बड़ी आकाशगंगा है, वो हमसे बीस लाख प्रकाशवर्ष की दूरी पर है. अगर आप बीस लाख साल पहले की पृ्थ्वी का चित्र खींचें, तो वहाँ मनुष्य का नामोनिशान भी नहीं होगा, क्योंकि हमें नहीं लगता कि उस समय तक मनुष्य आए होंगे. ये उदाहरण आपको समय के अंतराल से दूरी का आभास भर देता है. हबल स्पेस टेलिस्कोप के ज़रीए हम कई सौ करोड़ों, अरबों वर्षों को देख रहे हैं. पर अगर हम इतने सक्षम हो जाएँ और ऐसा कुछ कर पाएँ जिससे हम और पीछे देख सकें -- ऐसी घटनाएँ जो और पहले घटी हो, मैंने अपने बहुत सारे शोधकार्य में यही किया, ऐसी तकनीकों के विकास पर काम किया -- जिससे हम तारों और आकाशगंगाओं के बनने के युगों पहले की घटनाएँ देख सकें, उस समय की, जब ब्रह्माण्ड गरम और सघन और बहुत ही अलग था. तो घटनाक्रम कुछ ऐसा ही था, और मेरे पास इसकी एक काल्पनिक प्रस्तुति भी है. इसमें बीच में स्थित आकाशगंगा हमारी है, जिसे 'मिल्की वे' कहते हैं, और उसके चारों ओर हबल से दिखने वाली करीबी आकाशगंगाएँ हैं, और यहाँ एक गोलक पिण्ड है, जिससे अलग-अलग समय को चिन्हित किया गया है. और उसके पीछे नई आकाशगंगाएँ हैं. क्या आप इस पूरे परिदृश्य को समझ पा रहे हैं? समय की उत्पत्ति कुछ अजीब है -- ये बाहर की ओर है, ठीक? और ब्रह्माण्ड का एक हिस्सा ऐसा भी है जिसे हम देख नहीं सकते क्योंकि वो इतना सघन और गरम है, कि उससे प्रकाश भी बाहर नहीं निकल पाता. कुछ वैसे ही जैसे आप सूर्य के केन्द्र तक देख नहीं सकते, उसके लिए उन तकनीकों का प्रयोग करना होगा जो बताएं कि सूर्य के अंदर क्या घट रहा है. लेकिन आप सूर्य की सतह को देख सकते हैं, और कुछ इसी तरह से ब्रह्माण्ड को भी हम देख पाते हैं. अब बाहरी भाग के इस मॉडल जैसी जगह को देखिए, ये बिग बैंग से निकला विकिरण (रेडियेशन) है, जो कि अद्भुत एकरूपता से बिखरा हुआ है. ब्रह्माण्ड लगभग एक सटीक गोले की भांति है, पर उसमें कुछ बहुत ही छोटी अनियमितताएं हैं जिन्हें हम यहाँ बहुत बढ़ाकर दिखा कर रहे हैं. और उनमें से कालानुक्रम में बढ़ते हुए इन छोटी अनियमितताओं से इन बेडौल आकाशगंगाओ, और फिर प्रारंभिक तारों से विकसित आकाशगंगाओं की ओर से अंततः सौरमंडल में हम यहां तक आते हैं. संरचना की दृष्टि से ये बहुत बड़ी बात है, पर अब हम देखेंगे कि इस समय क्या चल रहा है. इन परिमापनों (मेज़रमेंट्स) के लिए उपग्रह समूहों का उपयोग किया गया, जिन्हें आप यहाँ देख सकते हैं. यहाँ आप कोबे (cobe) उपग्रह को देख सकते हैं, जिसे 1989 में छोड़ा गया था, और जिससे इन अनियमितताओं की खोज हुई. फिर 2000 में, मैप (map) उपग्रह - फिर wmap -- जिससे और अच्छी तस्वीरें मिली. और उसके बाद इस साल (2008) के अंत -- ये शानदार स्टेल्थ वर्ज़न है, जिसमें बहुत अच्छी डिज़ाईन क्षमताएँ हैं, अब देखिए -- प्लैंक उपग्रह को प्रक्षेपित किया जाएगा, जो बहुत अधिक रिज़ोल्यूशन के मानचित्र उपलब्ध कराएगा. और इस तारतम्य से ब्रह्माण्ड के आरंभ की समझ विकसित होगी. हमने इन तस्वीरों में अनियमितताओं को देखा, जिनसे अंतरिक्ष में समय के गठन, और ब्रह्माण्ड में निहित अवयवों के रहस्य उजागर होने लगे, साथ ही सृष्टि के प्रारंभ में उसकी उत्पत्ति के बारे में भी पता चलने लगा. तो हमारे पास ये बहुत ही अनूठी तस्वीर है, और अब मैं वापस शुरु से शुरु करता हूँ, जहाँ किसी रहस्यमयी प्रक्रिया से ब्रह्माण्ड की रचना होती है. फिर एक समय ऐसा आता है, जब त्वरित गति से विस्तार होता है, और ये ब्रह्माण्ड फैलने लगता है, फिर ये ठंडा होकर उस अवस्था तक पहुँच जाता है, जब ये पारदर्शी बन जाता है, फिर अंधकार युग का आरंभ होता है, जिसके बाद सर्वप्रथम तारों का जन्म होता है, जो आकाशगंगाएँ बनाते हैं, फिर उनसे और अधिक विस्तृ्त आकाशगंगाओं का विकास होता है. कुछ इसी दौरान हमारा सौर मण्डल अस्तित्व में आने लगता है. और ये आज भी विकसित हो रहा है. और भी कुछ अद्भुत चीज़ें हैं. ये जो चोगे जैसा आकार है, ये दर्शाता है कि इस दौरान अंतरिक्ष में समय का ढाँचा क्या कर रहा है. ये बहुत ही विचित्र मॉडल है, है ना? तो फिर किस आधार पर हम इसे सही मान रहे हैं? चलिए मैं आपको प्रकृ्ति में निहित कुछ संरचनाएँ दिखाता हूँ जो इसी का परिणाम है. मेरा मानना है कि स्पेसटाइम अंतरिक्ष की मुख्य सारवस्तु है, जबकि ये आकाशगंगाएँ और तारे सिर्फ समुद्र की झाग की तरह है. ये सब संकेत हैं कि हमें कहां रोचक तरंगें मिलेंगी और वहाँ क्या हुआ होगा. ये है स्लोअन डिजिटल स्काई सर्वे जिससे इस समय हम लाखों आकाशगंगाएँ देख रहे हैं. यहाँ का हर बिन्दु एक आकाशगंगा है. इसमें टेलिस्कोप के ज़रिए आकाश की तस्वीरें ली जाती हैं, उनमें से तारों को छांटकर अलग करके आकाशगंगाओं का अध्ययन किया जाता है, उनकी दूरी का अनुमान लगाकर उन्हे अंतरि़क्ष के मानचित्र में डाल दिया जाता है, और फैलते हुए अर्द्ध-व्यास में उनके स्थिति की दिशा के अनुसार लगा दिया जाता है. आप इन संरचनाओं को देख रहे हैं, इ�
and so, i have my first slide to talk about the dawning of the universe and what i call the cosmic scene investigation, that is, looking at the relics of creation and inferring what happened at the beginning, and then following it up and trying to understand it. and so one of the questions that i asked you is, when you look around, what do you see? well, you see this space that's created by designers and by the work of people, but what you actually see is a lot of material that was already here, being reshaped in a certain form.
Last Update: 2019-07-06
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