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the novel narrates the emotional entanglements of ulka .

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उपन्यास में उल्का की भावुक उलझनों का वर्णन है ।

Laatste Update: 2020-05-24
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we had to avoid military entanglements and concentrate on construction .

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हमें सैनिक गढजोड़ो से बचना था और अपने निर्माण पर ध्यान क्रेन्दित करना था ।

Laatste Update: 2020-05-24
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any other approach at this time would not only land us in entanglements , from which we would find it difficult to extricate ourselves except by prejud - icing whatever advantages we have gained , but also likely to be misunderstood and severely criticised by public opinion in india .

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इस समय अन्य कोई मार्ग न केवल हमें ऐसी उलझनों में फंसा देगा , जिनमें से प्राप्त लाभों को हानि पहुंचाये बिना स्वयं को छुडाना हमारे लिए कठिन होगा , बल्कि हमें संभवतः भारत में गलतफहमी का शिकार तथा लोकमत की कडी टीका का पात्र भी बना देगा ।

Laatste Update: 2020-05-24
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entanglements of the intellect while solving files with equanimity there are two parts in this case: there is vengeance (ver) with people there is attachment and abhorrence (raag-dwesh) whether it is ver or it is illusory attachment (moha) there are two pitfalls attachment (raag) or abhorrence (dwesh) with people but as we continue to clean [older mistakes] a new puzzle arises for us "i am not able to progress further" and" i am not able to see my mistakes"

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फाइलों के समभाव से हल लाने में बुद्धि की उलझनें (पारायण - 2010) इसके दो भाग पड़ते हैं व्यक्तिओं के साथ बैर हैं राग-द्वेष है बैर होता है या मोह होता है दो गड्ढ़े होते हैं वक्तिओ के साथ हुए राग-द्वेष लेकिन उसे चोखा करते करते आपको यह नया पज़ल खड़ा हो जाता है मैं आगे बढ़ नहीं पा रहा और मुझे दोष दिखाई नहीं देते और मेरे दोष जाते नहीं है कब इसका अंत आएगा ऐसा नया कचरा आपको खड़ा नहीं होने देना है आप धीरे-धीरे शक्तियाँ माँगो, हल लाओ और आसान उपाय इतना ही है दादाश्री साफ कहते हैं कि कितनी हज़ार परतें होंगी तो भी एक परत हटेगी, एक प्रतिक्रमण से दूसरी परत दूसरे प्रतिक्रमण से हटेगी जैसे-जैसे प्रतिक्रमण करते जाओगे वैसे-वैसे परतें हटती जाएँगी और दुःखी होने जैसा कुछ है ही नहीं आप सही समझ बिठाकर अपना पुरुषार्थ करो आप करते रहो वह छूट गया या नहीं, दाग़ छूट गया नहीं उसे देखने के लिए भी आपको रुकना नहीं है आप धोते रहो आपकी प्रकृति में उफान आ गया दुःख हो जाए ऐसा कुछ बोल दिया तो फिर से प्रतिक्रमण करो फिर से उन्हें कुछ गलत बोल दिया तो फिर से प्रतिक्रमण करो ऐसा, धीरे-धीरे समझकर भोगवटा (सुख या दुःख का असर भुगतना) लेकर बैठ नहीं जाना है इसी तरह भूल करने में भी बेदरकार नहीं रहना है भूल पर जागृति रखेंगे पछतावा करेंगे दादाजी से शक्तियाँ माँगेंगे सामनेवाले निमित्त के साथ एडजस्टमेन्ट लेने के लिए प्रार्थनाएँ करेंगे सामनेवाली व्यक्ति का उपकार मानेंगे पॉज़िटिव देखेंगे पहले एक सामायिक आज करनी हो तो करेंगे एसी करें कि आपको ये सारी जो उलझनें पैदा होती हैं न है न, ये सब ऐसे ही प्रश्न आएँ हैं न मुझे दोष करने नहीं हैं लेकिन हों जाते हैं मुझे प्रतिक्रमण करने में बोरियत लगती है अथवा दोष ठीक से दिखाई नहीं देते नहीं दिखाई देते तो आप शक्ति माँगो यानी फिर से चीकणी फाइलें (गाढ़ ऋणानुबंधवाले व्यक्ति) करीबी कुछ चीकणी फाइलें देवरानी-जेठानी सास-बहु और भाई-भाई ग्राहक-व्यापारी और नौकर-सेठ और सभी करीबी व्यक्तिओं के साथ जो चीकणी फाइलें हों वे फाइलें वहीं की वहीं रहेंगी लेकिन उनके लिए जो जागृति की प्रोसेस है उसमें आप फिर से थोड़ा सा रीसेट करीए आपको इस उलझन में नहीं पड़ना है कि ये दोष दिखाई नहीं देते नहीं दिखाई देते तो शक्तियाँ माँगेंगे उलझन में नहीं पड़ना है उलझन का कारण क्या है? वे अच्छी तरह से आगे बढ़ गए और मैं रह गई वे अच्छी तरह से आगे बढ़ गए और मेरी प्रगति क्यों नहीं हो रही है ऐसा कुछ भी नहीं है आप सभी प्रवाह में धीरे-धीरे आगे बढ़ ही रहे हो मोक्षमार्ग में शक्ति माँगते हुए आपको धीरे-धीरे पूरा करना है यानी आज आप ऐसी सामायिक करें कि ये सब नेगेटिविटी ये उलझनें, ये कषाई, सभी दोषों के लिए उलझन में नहीं पड़ना है और अच्छी तरह से निश्चय करें कि इसमें ऐसी उलझनों में हम उलझ जाएँगे न तो उल्टा आगे का देखना बाकी रह जाएगा धोना बाकी रह जाएगा और उल्टा सिट-डाउन करवा देंगे मतलब आपको ऐसा सब खड़ा हो तो उलझन में नहीं पड़ना है लेकिन उसी समय सोल्यूशन ले आना है ऐसी कोई समझ फिट कर लेनी है अपने पास कितने सारे शब्द हैं प्रार्थना, प्रतिक्रमण, पोज़िटिविटी फिर शक्ति माँगने का तरीका कितने सारे अच्छे उपाय हैं प्रतिक्रमण करने हैं तो ऐसे छोटे-छोटे दादाजी के ही प्रयोग सेट करके दादाजी के ही ज्ञान के वाक्य सेट करके ये उलझनें खड़ी नहीं होनी चाहिए वर्ना क्या होगा कि आप थोड़ा-थोड़ा आपका थोड़ा टाइम बिगड़ेगा लेकिन उलझन के समय फिर से थोड़ा ज़ोर लगाएँगे फिर से बाहर निकल जाएँगे इसलिए आज खास तौर से शक्तियाँ माँगो फिर से उलझनें खड़ी न हों वही की वही चीकणी (गाढ़) भले ही दस फाइलें हों या पाँच हों लेकिन चीकणी फाइलें आएँ तब यदि कहो कि मुझ से ऐसा नहीं हुआ और वैसा नहीं हुआ नहीं, तब एक तो जुदापना एक नियम समझ लेंगे पहले जुदापना रखना है फाइल अलग और मैं शुद्धात्मा अलग यह पहला स्टेप अब जो भी कोई उलझन खड़ी होती है या जिन दोषों से टकराव हो जाते हैं फाइल के साथ व्यक्तिओं के टकराव हो जाते हैं उनका शुद्धात्मा अलग, वह फाइल अलग आपका शुद्धात्मा अलग, यह फाइल अलग यानी यह पहली जागृति सेट करनी ही है नियम से सेट करनी है फिर आपका भरा हुआ माल और उनका भरा हुआ माल प्रकृति के हिसाब सब चुकते हो रहे हैं और उसमें आपको कम दोष दिखाई दे या दोष नहीं दिखाई दे या जितने दोष दिखाई दे वे जो नहीं दिखाई देते हैं उनका लिस्ट बनाइए जितना समझ में आया उतना समझ लो और जितना दिखाई दिया समझ में आया, उनका धीरे-धीरे शक्ति माँगकर प्रतिक्रमण करो माफी माँगो, फिर से भूलें न हों ऐसे निश्चय करो ऐसे करते-करते अपना मोक्षमार्ग का पुरुषार्थ चालू है इसमें वर्तन नहीं सुधरा दोष कम नहीं हुए उसका बोझ रखने जैसा नहीं है आज अभिप्राय बदल गया आज आप कौन सी टिकट निकलवा रहे हो तो आपको नेक्स्ट उस स्टेशन की टिकट मिलेगी अगले जन्म इस स्टेशन तक पहुँचा देगी और यह जो पिछले जन्म में जो टिकट ली थी वह स्टेशन आज आकर खड़ा रहा है यानी आज की अंदर की भाव शुद्धि या भाव जागृति में आपको चौकस रहना है तो क्या होगा कि यही परिस्थिति में आप चौकस रहो तो चाहे कैसा भी दादा कहते हैं न कि विषय की चाहे कितनी बड़ी गाँठ हो या मान की चाहे कितनी बड़ी गाँठ हो मोह की गाँठ बड़ी हो धार्युं करने की बड़ी गाँठ हो लेकिन आज आपकी सहमतता किस में है तो वह आपका अगले जन्म का स्टेशन रहेगा तो आप पाँच आज्ञा, वही सहमतता रखें प्रतिक्रमण करने के भाव रखें यदि प्रतिक्रमण नहीं कर सकते हों तो भी मेरे भाव में सौ प्रतिशत इच्छा है प्रतिक्रमण करने ही हैं। आप यह भाव तक भाव जागृति सेट कर लेंगे तो आपकी पूरी कमाई आप कर सकोगे उसमें नुकसान नहीं होगा यानी ऐसे सब साधन सेट करके आप अपनी प्रगति कर लें चूके बगैर ये उलझनें खड़ी होंगी कि कब होगा और अभी भी ऐसा क्यों होता है? ऐसा क्यों होता है? ऐसा सब तो होगा यह है न आप यह ध्यान नहीं तो कहेंगे साँस अंदर जा रही है वापस बाहर आ रही है वापस अंदर जा रही है वापस ऐसा कब तक चलता रहेगा ऐसा क्यों होता होगा? इस नथुने में से हवा अंदर जाती है फिर वापस क्यों बाहर नकल जाती है अरे इसकी चिंता करने जैसा है ही नहीं यह तो कुदरती प्रोसेस है आँखें झपकती ही रहती हैं किसी को ऐसी साइकिक इफेक्ट हो गई हो न तो आँखें बंद हो जाती हैं फिर खुल जाती हैं वापस बंद हो जाती हैं, वापस ऐसा क्यों होता होगा? अरे, यह तो अपने आप होता रहता है ऐसा ये भी अपने आप डिस्चार्ज यानी क्या? अपने आप होते रहना ऐसे ही ये सारे दोष भी दोष नहीं माने जाते वह तो भरा हुआ माल खाली होता रहता है आपको लगता है कि मुझे ऐसा क्यों हो रहा है? मुझे हो रहा है ऐसा मानना ही नहीं है आपको उसे अलग रखना है कि यह जिसे हो रहा है वह इसे हो रहा है इस पुद्गल (जो पूरण और गलन होता है), पुतले को हो रहा है मैं अलग और पुतला अलग भरा हुआ माल खाली हो रहा है वह खाली नहीं होगा न वह खाली कैसे होगा वह टकराव से होगा ऐसे निमित्त टकराते जाएँगे जैसे, जैसे कि यदि लोहे का गरम-गरम गोला हो और दियासलाई को उससे स्पर्श करवाओगे तो दियासलाई थोड़ी सी गरमी खींच लेगी तो गोला थोड़ा ठंडा होता जाएगा पवन स्पर्श होगा तो पवन थोड़ी गरमी खींच लेगा, थोड़ा ठंडा होता जाएगा वह निरंतर ठंड़ा हो ही रहा है ऐसे ही अपना तो अपनी प्रकृति का गोला भी ठंड़ा हो ही जानेवाला है लेकिन इन निमित्तों के साथ कुछ टकरा गए, कुछ भोगवटा (सुख या दुःख का असर, भुगतना) लेकिन वास्तव में टकराते नहीं ये परमाणु के हिसाब पूरे होकर, पूरे हो रहे हैं और परमाणु के रस विलय होते जा रहे हैं और निमित्त अलग होते जा रहे हैं मतलब जितने प्रसंग बनें उतना अपना माल विलय होता जा रहा है आपको उलझने की ज़रूरत नहीं है परेशान होने की भी ज़रूरत नहीं है यह होगा या नहीं होगा आपको तो पाँच आज्ञा, वही मेरा ध्येय है प्रतिक्रमण होने ही चाहिए, करने ही चाहिए शक्तियाँ माँगते रहिए और काफी सारा लिस्ट, आपको पता ही है कितने प्रकार के दोष और वे दोष, चले क्यों नहीं गए? अरे चले क्यों नहीं गए? ऐसा नहीं वे तो रहेंगे ही, आप उनसे अलग हो ऐसी आपको जागृति रहे मतलब आपकी सेफ साइड वह तो जब उनका समय आएगा तब चले जाएँगे आप अलग रहे यानी आप अपनी प्रगति के लिए मुक्त हो गए यानी धीरे-धीरे ऐसा समझ-समझकर आज समझ लो कि ये उलझनें यदि खड़ी होती हों तो सही समझ सेट कर लें ताकि आपको उलझन नहीं रहे आप आनंद में रह सको और ये भरा हुआ माल तो एक दो जन्म में पूरा होनेवाला है दादाजी को नहीं छोड़ना है और हमें ये मोक्षमार्ग नहीं छोड़ना है हमें यह विज्ञान नहीं छोड़ना है इस स्टीमर पर से हमें उतर नहीं जाना है ऐसा आपका निश्चय है और वास्तव में इसलिए तो भाग-भागकर सत्संग में आते हैं इसलिए हम चूकनेवाले भी नहीं हैं ऐसा डर भी मत रखना आपका निश्चय स्ट्रोंग है आप ये मोक्षमार्ग चूक ही नहीं सकते मतलब ये थोड़ा सामायिक में अपन लेते हैं कहाँ-कहाँ, कौन सी परिस्थिति आपको परेशान करती है, ढूँढ निकालो और उसे सही समझ से सोल्व, सेट करो ताकि आपको परेशानी नहीं रहे हाँ, कचरा भले न लाख पाँच गोडाउन हो या आठ गोडाउन हो वह तो अंदर बड़े गोडाउनवालों के लिए बड़ी ट्रकें आती हैं ज़्यादा माल ले जाती हैं छोटी दुकानवाले के पास एक-दो ग्राहक आते हैं और धीरे-धीरे दुकान इसकी दुकान तीन साल में खाली हो जाती है और उसका भी तीन साल में पूरा गोडाउन भी खाली हो जाता है यानी ज़्यादा दुःखी होने जैसा नहीं है कि इतना ज़्यादा माल चला गया अरे, लेकिन नहीं, पूछकर देख लो ये �

Laatste Update: 2019-07-06
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